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एक व्यक्ति की जैविक प्रणाली किसी भी चीज़ की लत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नशे की लत वाले युवा वयस्क मस्तिष्क के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परिवर्तन दिखाते हैं

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नशे की लत वाले युवा वयस्क मस्तिष्क के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परिवर्तन दिखाते हैं
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कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन से यह पता चलता है कि नशे की लत की वजह से युवा वयस्कों के मस्तिष्क के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई खामियों का विकास होता है।

यह अध्ययन 15 फरवरी, 2019 को न्यूरोसाइकोफार्माकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ था।

इस अध्ययन के अनुसार, एक व्यक्ति की जैविक प्रणाली किसी भी चीज़ की लत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किशोरावस्था या युवा वयस्कता के समय, लोगों में नशे की लत से जुड़े कई व्यवहार विकसित होते हैं और यह जोखिम भरे हो सकते हैं।

इस नए अध्ययन को करने के लिए, 16 से 26 वर्ष की आयु के बीच के लगभग 99 युवा वयस्कों का कंप्यूटर आधारित आवेग कैलकुलेटर के माध्यम से विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन से जुड़े स्वयंसेवकों के दिमाग का भी ऐसी व्यवस्था के साथ विश्लेषण किया गया जो माइलिन सामग्री के प्रति संवेदनशील थे।

माइलिन एक प्रोटीन से भरपूर आवरण है जो हमारे शरीर और मस्तिष्क में तेजी से नसों का संचालन करने के लिए जरूरी होता है। जिन युवा वयस्कों में उच्च व्यवहार संबंधी आवेग मापा गया था, उनमें पुटम में माइलिन के निम्न स्तर को देखा गया था।

आवेग विकार हमारे व्यवहार और मस्तिष्क में परिवर्तन के कारण होता है। यह सामान्य लोगों में खतरे को बढ़ाता है जिससे मनोरोग और स्नायविक विकार होते हैं।

इस अध्ययन में, युवा वयस्कों में व्यवहार संबंधी आवेग और पुटामेन में उनकी तंत्रिका कोशिकाओं में अनियमितताओं के बीच एक मजबूत कड़ी को दिखाया गया है। पुटामेन हमारे मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो नशे की लत के विकारों से जुड़ा हुआ है।

डॉ कैमिला नॉर्ड, इस अध्ययन की एक प्रमुख लेखक हैं, इन्होनें कहा, "जिन लोगों में बढ़े हुए आवेग दिखाई देते हैं, उनको कई मानसिक स्वास्थ्य समयस्याओं का अनुभव होता है, जिनमें पदार्थ और व्यवहार व्यसनों, खाने के विकार और एडीएचडी शामिल हैं।"

डॉ नॉर्ड ने यह भी कहा, "हम जानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अधिकांश लक्षण कुछ विशेष विकारों के लिए विशिष्ट नहीं होते हैं। यह कार्य मस्तिष्क के चिन्हों को स्थापित करने में पहेली का एक महत्वपूर्ण टुकड़ा प्रदान करता है जो कई मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए विशिष्ट की बजाय सामान्य है।"

इस अध्ययन के सह-लेखक, डॉ सेउंग-गू किम ने कहा, "मेलिनक्रिया की मात्रा तंत्रिकाकोशिका के संचार की गति और दक्षता को बदल सकती है, जिसका मतलब है कि अगर किसी आबादी ने केवल एक विशेष क्षेत्र में ही मेलिनक्रिया को कम किया है, जैसा कि हम दिखाते हैं, तो तंत्रिका गति और दक्षता में किसी भी बदलाव के बारे में बहुत कुछ स्थानीय हो जाता है।"

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह घोषित करना अभी तक असंभव है कि गिरे हुए मेलिनक्रिया से व्यक्तियों में आसन्नता आ जाती है। यह इस वज़ह से कि इस अध्ययन के सभी प्रतिभागी स्वस्थ थे और वे किसी भी लत या किसी अन्य मनोरोग के निदान से नहीं गुज़रे थे।

इस अध्ययन के निष्कर्ष व्यक्ति में नशे की लत से संबंधी विकार को विकसित करने के खतरे को दूर करने के लिए निश्चित रूप से कुछ मददगार साबित होंगे। इसके लिए शोधकर्ता अभी आगे शोध और परीक्षण भी करेंगे।

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