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नैदानिक परीक्षण के दौरान, प्रतिभागियों ने प्लेसबो की तुलना में नाक में डालने वाले स्प्रे के साथ अवसाद की गंभीरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव दिखाया।

एफडीए ने अवसाद के इलाज के लिए एक नई दवा को मंजूरी दी

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एफडीए ने अवसाद के इलाज के लिए एक नई दवा को मंजूरी दी
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अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने वयस्कों में अवसाद के इलाज के लिए नाक में डालने वाले एक स्प्रे को मंजूरी दी है। यह घोषणा एफडीए द्वारा 5 मार्च 2019 को की गई थी।

इस नई दवा को एसकेटामाइन कहा जाता है और इसे जैनसन फार्मास्युटिकल्स इनकॉरपोरेशन द्वारा बनाया गया है। एसकेटामाइन स्प्रवाटो नामक ब्रांड के तहत बेचा जा रहा है और यह उन रोगियों के लिए उपलब्ध है जो पहले अन्य अवसादरोधी दवाओं से इलाज करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उनसे कोई लाभ नहीं हुआ है।

एसकेटामाइन केटामाइन का एक एस-एनानटयोमर है। केटामाइन दो एनानटयोमर (दर्पण छवि के अणु) का एक मिश्रण होता है। एफडीए ने वर्ष 1970 में केटामाइन को मंजूरी दी थी।

इस दवा की दक्षता, प्रभाव और सुरक्षा का अध्ययन और बारीकी से मूल्यांकन करने के लिए, जैनसन कंपनी द्वारा नियंत्रित नैदानिक परीक्षण किए गए थे। इस नैदानिक परीक्षण में 331 प्रतिभागी शामिल थे, जिसमें मरीजों को एसकेटामाइन, प्लेसबो और अन्य अवसाद रोधी दवाएं दी गई थी।

जो लोग अध्ययन का हिस्सा थे, उनमें एक बात समान थी। उन्होंने अन्य अवसाद रोधी दवाएं ली थी, लेकिन उनको उन दवाइयों का कोई लाभ नहीं हुआ था। वे उपचार-प्रतिरोधी अवसाद से गुज़र रहे थे।

अध्ययन में तीन अल्पकालिक और एक दीर्घकालिक नैदानिक परीक्षण शामिल थे। नैदानिक परीक्षण के दौरान, प्रतिभागियों ने प्लेसबो की तुलना में नाक में डालने वाले स्प्रे लेने के साथ अवसाद की गंभीरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव दिखाया। उपचार के दो दिनों के भीतर प्रभाव देखा गया। हालांकि, अन्य दो अल्पकालिक परीक्षण पूर्व-निर्धारित सांख्यिकीय परीक्षणों से नहीं मिले।

नैदानिक परीक्षण के दौरान नए उपचार प्राप्त करने वाले लोगों के कुछ दुष्प्रभाव दिखाए। मरीजों को चक्कर, मतली, संवेदनशीलता में कमी, चिंता, उल्टी, रक्तचाप में वृद्धि, नशे जैसा अनुभव हुआ।

जैसा कि एफडीए द्वारा कहा गया है, सुरक्षा कारणों से, यह नई दवा केवल एक प्रतिबंधित वितरण प्रणाली के तहत उपलब्ध है और इसे एक चिकित्सा अधिकारियों में विनियमित किया जाएगा जहां एक स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता रोगी की निगरानी कर सकता है।

स्प्रवाटो से संबधी एक चेतावनी भी है जो रोगियों को सावधान करती है कि उन्हें दवा लेने के बाद ध्यान लगाने में कठिनाई, बेहोशी, निर्णय लेने और सोचने में कठिनाई, आत्महत्या करने के विचार और व्यवहार होने का खतरा हो सकता है।

एफडीए कहती है की चिकित्सा अधिकारियों को कुछ सावधानियां रखने की आवश्यकता है। एफडीए का यह भी कहना है कि दवा लेने के दो घंटे बाद तक मरीज पर नजर रखी जानी चाहिए और यह दवा घर पर नहीं लेनी चाहिए। यह भी सलाह दी जाती है कि यह दवा लेने के बाद रोगी को पूरे दिन गाडी नहीं चलानी चाहिए।

टिफ़नी फारचियोन, एफडीए के ड्रग इवैल्यूएशन एंड रिसर्च सेंटर में डिवीज़न ऑफ़ साइकाइट्री प्रोडक्ट्स के कार्यवाहक निदेशक ने कहा, “उपचार-प्रतिरोधी अवसाद, एक गंभीर और जान-लेवा स्थिति के लिए अतिरिक्त प्रभावी उपचार की लंबे समय से आवश्यकता है।"

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार, अमेरिका में लगभग 16 मिलियन (लगभग 1.6 करोड़) लोग अवसाद से पीड़ित हैं। चिकित्सा, मनोचिकित्सा, दवाएं आदि अवसाद से लड़ने में मदद कर सकते हैं।

अवसाद से लड़ने के लिए इस तरह के नए उपचारों का विकास मानव स्वास्थ्य के लिए एक उपलब्धि और आवश्यकता है।

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