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यह नव निर्मित प्रणाली ऊतक में 8 सेंटीमीटर गहराई में जाकर संकेत की पहचान कर सकती है।

प्रारंभिक चरण में कैंसर का पता लगाने के लिए एक नया उपकरण

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प्रारंभिक चरण में कैंसर का पता लगाने के लिए एक नया उपकरण
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मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआईटी) के शोधकर्ताओं ने एक इमेजिंग प्रणाली विकसित की है, जिसे डॉल्फिन कहा जाता है। यह शरीर के अंदर गहरे ट्यूमर की पहचान कर सकती है।

यह शोध 7 मार्च, 2019 को साइंटिफिक रिपोर्ट्स नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

रिपोर्टों के अनुसार, पहले हमारे पास कैंसर का पता लगाने के लिए बायोमेडिकल ऑप्टिकल इमेजिंग तकनीक थी। इस तकनीक से विश्वसनीय परिणाम नहीं मिलता था जब तक उसे लगभग 1 सेंटीमीटर अंदर तक नहीं डाला जाए। कंप्यूटर टोमोग्राफी (सीटी) या चुम्बकीय अनुनाद प्रतिबिम्बन (एमआरआई) ऐसी प्रौद्योगिकियां हैं।

शोधकर्ताओं ने एक नई प्रणाली डॉल्फिन (डिटेक्शन ऑफ़ ऑप्टिकली लुमिनेसेन्ट प्रोब्स यूसिंग हाइपरर्स्पेक्ट्रल एंड डिफ्यूज इमेजिंग इन नियर-इंफ्रारेड) का निर्माण किया है जो ऊतक में 8 सेंटीमीटर गहराई में जाकर संकेत की पहचान कर सकती है। जब कि मौजूदा बायोमेडिकल ऑप्टिकल इमेजिंग प्रणाली केवल 3 सेंटीमीटर अंदर तक ही जा सकती है।

यह नई तकनीक निकट-अवरक्त प्रकाश पर आधारित है जो 900-1700 नैनोमीटर से तरंग दैर्ध्य पर काम करती है। यह ऊतक में गहराई से घुसने में सक्षम होती है।

शोधकर्ताओं की टीम ने हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग प्रक्रिया का उपयोग किया जो प्रकाश के कई तरंग दैर्ध्य में इमेजिंग कर सकती है। बाद में उन्होंने विभिन्न तरंग दैर्ध्य के प्रतिदीप्त प्रकाश का पता लगाने के लिए हाइपरस्पेक्ट्रल स्कैन से उत्पन्न जानकारी एकत्र की।

इस प्रक्रिया के माध्यम से, उन्होनें जांच के विशिष्ट उपकरण की गहराई का पता लगाया। इन उपकरणों को आसान लक्ष्यीकरण करने और विशिष्ट कैंसर कोशिका को प्रतिदीप्तिशील रूप से लेबल करने के लिए संशोधित किया जा सकता है।

नीलकंठ बर्द्धन, अध्ययन के प्रमुख लेखक, ने कहा, “व्यावहारिक अनुप्रयोगों के संदर्भ में, यह तकनीक हमें गैर-आक्रमणशील रूप से 0.1-मिलीमीटर-आकार वाले प्रतिदीप्तिशील रूप से लेबल ट्यूमर का पता लगाने की अनुमति देगी, जो कुछ सौ कोशिकाओं का एक समूह है। जितना हमें पता है, कोई भी पहले से ऑप्टिकल इमेजिंग तकनीकों का उपयोग करके यह करने में सक्षम नहीं हुआ है। "

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक एंजेला बेल्चर ने कहा, “हम ट्यूमर की पुनरावृत्ति का पता लगाने का एक तरीका जानना चाहते हैं, और अंततः शुरुआती ट्यूमर के बारे में जानने का तरीका पता करना चाहते हैं जब वे पहली बार कैंसर या मेटास्टेसिस का रूप लेता है। यह इस तकनीक के विकास के संदर्भ में पहला कदम है।"

रिपोर्टों के अनुसार, शोधकर्ता आगे इस तकनीक के विभिन्न संस्करणों को अंडाशय कैंसर के प्रारंभिक चरण में पहचान करने के लिए भी जांच रहे हैं। अंडाशय ट्यूमर के लक्षण बहुत देर बाद दिखाई देते हैं जिसके कारण प्रारंभिक चरण में इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

अंडाशय कैंसर के अलावा, शोधकर्ता अन्य प्रकार के कैंसर जैसे मस्तिष्क कैंसर, अग्नाशय कैंसर और मेलेनोमा की पहचान करने के लिए डॉल्फिन के क्षितिज का विस्तार करने पर भी काम कर रहे हैं।

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